Apr 12, 2009

खेत खलियान और पानी

खेत खलियान और पानी
सावन हो सुहानी

राते अफ़सानी
दिन रहे तूफानी

इश्‍क को जवानी
सरहद पर जहानि

मेरी तेरी कहानी
हुई बात पुरानी

चारो पहर सलामी
सागर देता पानी


खेत खलियान और पानी
सावन हो सुहानी
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जैसे पागल बंजारा

रात को सितारा
लहरो को किनारा


भौरे हुए आवारा
माँ को नही सहरा

सदियों दर्द मे गुज़रा
कास्ती को पतवारा

दीपक तले उजियारा
दर्द नही गवारा

सरे उम्र न बहार आ
मिली एक सहारा

जैसे खजूर की छाया
धरती क्यूँ हत्यारा

सागर क्यूँ खारा
मे हुआ आवारा

जैसे पागल बंजारा

एक ऐसा वर्ष

नई शुबह, नई शुरुआत, नई बात
आइये स्वागत करते है एक नए वर्ष की
जिस की पुनराब्रित शादियो तक होती रहे
एक ऐसा दामन जो कभी अश्क से कभी गीली न हो
एक ऐसा वर्ष .........

जो दर्द के लिए दवा,
रात के लिए दिन,
दिलों के लिए धड़कने,
इश्क को जवानी,
पनघट में पानी,
पेडों को पत्ते,
सपने बने हकीकत,
आख्नो में उम्मीदे,
बेटे को माँ के लिए प्यार,
बच्चो को उचित शिक्षा और संस्कार,
सरहद पर अमन, चैन, शुख और शान्ति,
मूकअम्मिल दिन, सुनहरा सूरज, चांदनी राते,
कोयल को कु, कु,
शाहिल को सरगम,
खेतो में पानी,
सावन सुहानी,
पतझड़ को बहार,
धरती को प्यार,
राही को रास्ता,
मुशाफिर को मंजिल,
मृत्यु को जीवन,
जीवित को भोजन,
रोजगार, स्वीकार, परोपकार,
उमंग, तरंग, सरंग,
ईद, दिवाली, दसहरा,
पंछी को घोंसले,
हमको हौसले लेकर आए ,
जो धरती के उज्जवल भविष्य के निर्माण में धरती के सहयोगियों की सहायता करे
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