भर पेट भोजन की हवस को, काम करता आदमी
आज देखा, कत्ल करते आदमी का आदमी
जान की बाजी लगी है, आग चारो और फैला
कौन तेरा, कौन मेरा, पाप धोता आदमी
चले तो थे सुबह की और, पर ये रात कैसे आ गई
आलसी जीवन में ना विकास करता आदमी
अमर बानि है ये सुन लो, बात झूठी है नही
प्रेम पथ पर जो चले तो, ख्याती पाता आदमी
अंधेर जीवन, रात बाकी, है न कोई साथ साकी
भाग्य पहले, फिर समय को दोष देता आदमी
भर पेट भोजन की हवस को, काम करता आदमी
आज देखा, कत्ल करते आदमी का आदमी
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