ग़ज़ल में, तूफान लिख
पतझड़ में, बहार लिख
खेत लिख, खलिहान लिख
सुनहरा सहर हजार लिख
आखों में अंगार लिख
हाथों में गुलाल लिख
मधुमती बहार लिख
हसती आखें, हजार लिख
मान लिख, मेहमान लिख
मेरा देश महान लिख
बच्चों को संस्कार लिख
मेरी माँ को प्यार लिख
गुल लिख, गुल बाग लिख
पानी पत्थर पहार लिख
आज लिख, आवाज लिख
सरहद पर खड़ा जाबाजे लिख
ग़ज़ल में, तूफान लिख
पतझड़ में, बहार लिख
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Apr 14, 2009
मेरे बस्ती का अजीब था रिवाज
मेरे बस्ती का अजीब था रिवाज, मे चिराग नही ,था फ़िर भी जलाया गया
मतकर आसमा छूने की बात, उठने से पहले ही जमीं पे लाया गया ,,
मेरे लिया कौन मासिह आएगा, जो जमीं से हटकर जगह बनाएगा
खाक से दोस्ती रही है बचपन से, क्या वो ही मेरा राह गुजर बन जाएगा ,,
अब तो नींद आने लगा है मेरे ख्वाबो को, क्या ख्याब भी सेहरा सा बिरान हो जायेगा
मेरे बस्ती का अजीब था रिवाज , मे चिराग नही था, फ़िर भी जलाया गया ,,
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मतकर आसमा छूने की बात, उठने से पहले ही जमीं पे लाया गया ,,
मेरे लिया कौन मासिह आएगा, जो जमीं से हटकर जगह बनाएगा
खाक से दोस्ती रही है बचपन से, क्या वो ही मेरा राह गुजर बन जाएगा ,,
अब तो नींद आने लगा है मेरे ख्वाबो को, क्या ख्याब भी सेहरा सा बिरान हो जायेगा
मेरे बस्ती का अजीब था रिवाज , मे चिराग नही था, फ़िर भी जलाया गया ,,
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पहले मेरी किश्मत यूँ न थी....
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
दर्द सिने को छू ना थी,
आह निकली ना थी,
प्यार झूठी ना थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
कलम थी, कलाम थी,
सहर तब तमाम थी,
ज़मीन थी जहाँन थी,
मेरे साथी तब तमांम थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
पतझड़ में बहार थी ,
कश्ती को पतवार थी,
पत्थर, पानी, पहार थी,
नही कोई दिवार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
हवा में तूफान थी,
जमीं बेकरार थी,
साथी, सहर, तमाम थी,
नही कोई दरार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
रास्ते हजार थे ,
सहर, शाहिल, बहार थे,
अधूरी कहानी न थी ,
आंख में पानी न थी ,
पहले मेरी किश्मत यूँ न थी,
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दर्द सिने को छू ना थी,
आह निकली ना थी,
प्यार झूठी ना थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
कलम थी, कलाम थी,
सहर तब तमाम थी,
ज़मीन थी जहाँन थी,
मेरे साथी तब तमांम थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
पतझड़ में बहार थी ,
कश्ती को पतवार थी,
पत्थर, पानी, पहार थी,
नही कोई दिवार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
हवा में तूफान थी,
जमीं बेकरार थी,
साथी, सहर, तमाम थी,
नही कोई दरार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
रास्ते हजार थे ,
सहर, शाहिल, बहार थे,
अधूरी कहानी न थी ,
आंख में पानी न थी ,
पहले मेरी किश्मत यूँ न थी,
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