Jan 26, 2011

मेरे हुस्ने मुहब्बत आया है

मेरे हुस्ने मुहब्बत आया है,
गुले बहार अभी ठहेर जाए,,


वो आया है,
अबकी पिछली बहारो के ज़ख्म तो भर जाए,,

मेरे हुस्ने मुहब्बत आया है,
गुले बहार अभी ठहेर जाए,,

आज अपने चुप से तुमको मिलाएँगे हम

आज अपने चुप से तुमको मिलाएँगे हम,
इस दिल मे कितने आईने है, दिखाएँगे हम,,

गुले बरबाद की तमन्ना ना थी हुमको,
आज फिर तुमको यकी दिलाएँगे हम,,

कौन जाने की क्या है मेरे दिल के धड़कने का शबब,
सब से पूछे है क्यूँ ? आओ आज बताएँगे हम,,

रिस्तो मे दूरिया, ये जहन मे फ़ासले, वो रोज गुजरता है मेरे यादो के रास्ते,
ये किसको बताएँगे हम, आज अपने चुप से तुमको मिलाएँगे हम,,

सुना है झील सी है आखे उसकी

सुना है झील सी है आखे उसकी,
आज उसमे डूब के देखते है,,

सुना है बात करती है आईने से वो,
आज उसकी रूह मे उतर के देखते है,,

सुना है वो अजन्नताए मूरत है,
हम जल ना जाए ये सोच के जलते है,,

उसका रुकना जैसे वक़्त का रुकना,
और चले तो जमाना रुक के देखते है,,

मेरा नसीब ना था की उसको देखु,
हम तो खुद मे उसको देखते है,,

उसके वास्ते रुकु की मौत कर जाउ,
सायद वो खाब है, आज नीद से उठ के देखते है,,

सुना है झील सी है आखे उसकी,
आज उसमे डूब के देखते है,,