Apr 12, 2009

जैसे पागल बंजारा

रात को सितारा
लहरो को किनारा


भौरे हुए आवारा
माँ को नही सहरा

सदियों दर्द मे गुज़रा
कास्ती को पतवारा

दीपक तले उजियारा
दर्द नही गवारा

सरे उम्र न बहार आ
मिली एक सहारा

जैसे खजूर की छाया
धरती क्यूँ हत्यारा

सागर क्यूँ खारा
मे हुआ आवारा

जैसे पागल बंजारा

1 comment:

  1. its really very heart touching it just like a flash back what i did in my past and it also showing me what may happen in future
    i salute u Mr. Girish

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