जब वो अपने है तो पराया कौन
मेरे दरवाजे पे बेगाना आए कौन
अबकी मेरा कत्ल कराये कौन
एक मुहर्रम फिर से मनाये कौन
मेरे आखों तक दामन लाये कौन
कौन जाने अस्क छलकाए कौन
दिल जले ko दिल से lagaye कौन
आग सिने की बुझाये कौन
लग के साहिल से जीना सिखाए कौन
पतझड़ में बहार लाये कौन
सिने पर मरहम लगाए कौन
डूबती कसती में पतवार लगाये कौन
जब वो अपने है तो पराया कौन
मेरे दरवाजे पे बेगाना आए कौन
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