पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
दर्द सिने को छू ना थी,
आह निकली ना थी,
प्यार झूठी ना थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
कलम थी, कलाम थी,
सहर तब तमाम थी,
ज़मीन थी जहाँन थी,
मेरे साथी तब तमांम थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
पतझड़ में बहार थी ,
कश्ती को पतवार थी,
पत्थर, पानी, पहार थी,
नही कोई दिवार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
हवा में तूफान थी,
जमीं बेकरार थी,
साथी, सहर, तमाम थी,
नही कोई दरार थी,
पहले मेरी किस्मत यूँ न थी,
रास्ते हजार थे ,
सहर, शाहिल, बहार थे,
अधूरी कहानी न थी ,
आंख में पानी न थी ,
पहले मेरी किश्मत यूँ न थी,
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