Apr 20, 2009

जख्म भर गया था, कुरेदने आए है वो

जख्म भर गया था, कुरेदने आए है वो
मेरे मरने पे आंशु भी बहायेंगे जो

कभी सेहरा में साथी सा नजर आए थे जो
फिर नजर से दूर तलक चले जायेंगे वो

खुदखुशी करने की हिम्मत नही होती सबको
आज ये हिम्मत कर दिखाएँगे वो

जख्म भर गया था, कुरेदने आए है वो
मेरे मरने पे आंशु भी बहायेंगे जो


5 comments:

  1. बहुत अच्छी रचना है।

    खुदकुशी करने की हिम्मत नही होती सबको
    आज ये हिम्मत कर दिखाएँगे वो

    जख्म भर गया था, कुरेदने आए है वो
    मेरे मरने पे आँसु भी बहायेंगे जो

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  2. खुदखुशी करने की हिम्मत नही होती सबको
    आज ये हिम्मत कर दिखाएँगे वो

    क्यों उकसा रहे हो भाई ...सच में कर ली तो लेने के देने पड़ जायेगें.......!!

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  3. अच्छा लिखा है आपने और सत्य भी , शानदार लेखन के लिए धन्यवाद ।

    मयूर दुबे
    अपनी अपनी डगर

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  4. Is kavita ko padh kar pratik hota hai ki kavi ke dil pe bahut hi jakhm hai jo usaki kavita ke madhyam se dil ke bahar aati hai

    Dhanyaad

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