आती धूप दूर चाँद पर
धरती पर अधियारा है,
मानो जैसे दूर छितिज पर कोई भेष बदल कर आया है,,
सूरज सोया, रात जाग गयी
किरणे सोई, क्या बात हो गयी
चारो तरफ धुन्न्ध छा रहा, जो हर दिल को दहलाया है,
मानो जैसे दूर छितिज पर कोई भेष बदल कर आया है,,
टीम- टीम तारें जाग गये है,
क्या खुशियाँ सूरज साथ गये हैं
तुम सो जाओ, मई भी सो जाउ, जो निशचरी रत आया है,
मानो जैसे दूर छितिज पर कोई भेष बदल कर आया है,,
कौन सुने अब मेरी बात
फैला चारो ओर है रात
वो भी नज़रे फेर गया है, जो मेरी खुशियों का साया है,
मानो जैसे दूर छितिज पर कोई भेष बदल कर आया है,,
वो देखो- तारों की बारात आ गयी
सायद उनको रात भा गयी
मेरे इस बिचलित अवसर पर, वो भी बना तमासाया है,
मानो जैसे दूर छितिज पर कोई भेष बदल कर आया है,,
बहुत सुंदर लयबद्ध कविता.
ReplyDeleterealy amaging post dude!!!!.............keep it up!!!!!!!!
ReplyDelete:)
maza aa gaya ...........
ReplyDeletevery niceeeeeeeeee......
kya baat hai ...........
ReplyDeletevery nice...........